Vastu Tips: घर में रखी ये 5 चीजें बन सकती हैं दुर्भाग्य की वजह, सुख-शांति और तरक्की पर पड़ सकता है असर

नई दिल्ली: घर का वातावरण केवल उसकी सजावट से नहीं, बल्कि उसमें मौजूद वस्तुओं से भी प्रभावित होता है। वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसी चीजों का उल्लेख किया गया है जिन्हें नकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। मान्यता है कि इन वस्तुओं की मौजूदगी से मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह और आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक माहौल बनाए रखने के लिए इन चीजों को हटाना बेहतर माना जाता है।

युद्ध और विनाश दर्शाने वाली तस्वीरें

कई लोग घर को आकर्षक बनाने के लिए युद्ध, हिंसा, तबाही या संघर्ष से जुड़ी पेंटिंग और कलाकृतियां सजाते हैं। वास्तु मान्यताओं के अनुसार ऐसी तस्वीरें घर के वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। माना जाता है कि इनसे परिवार के सदस्यों के बीच तनाव और अशांति का माहौल बन सकता है।

बंद घड़ी और पुराने कैलेंडर

वास्तु और फेंगशुई दोनों में बंद घड़ी को प्रगति में रुकावट का प्रतीक माना गया है। इसी तरह बीते वर्षों के कैलेंडर को लंबे समय तक घर में लगाए रखना भी शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि इससे जीवन में ठहराव की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए खराब घड़ियों को ठीक करवाना या हटाना और समय पर कैलेंडर बदलना उचित माना जाता है।

टूटे या दरार वाले शीशे

आजकल सजावट के नाम पर टूटे या दरार वाले कांच का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन वास्तु शास्त्र में ऐसे शीशों को नकारात्मक ऊर्जा का कारण माना गया है। मान्यता है कि इनका असर घर के सदस्यों के मानसिक संतुलन और आपसी संबंधों पर भी पड़ सकता है।

कांटेदार पौधे

घरों में कैक्टस और अन्य कांटेदार पौधों का चलन तेजी से बढ़ा है। हालांकि वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसे पौधे रिश्तों में तनाव और मतभेद बढ़ाने वाले माने जाते हैं। कहा जाता है कि ये सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं और घर के माहौल को असंतुलित बना सकते हैं।

सांप और उग्र ऊर्जा दर्शाने वाली मूर्तियां

वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर में सांप की मूर्तियां या भय और आक्रामकता का भाव उत्पन्न करने वाली कलाकृतियां रखने से बचना चाहिए। इसी प्रकार नटराज की मूर्ति को भी कुछ वास्तु विशेषज्ञ घर के सामान्य वातावरण के लिए उपयुक्त नहीं मानते हैं। माना जाता है कि ऐसी वस्तुएं घर के ऊर्जा संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं।

 

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